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घमौरियों के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय – Home Remedies for Ghamori (Heat Rash) in Hindi

गर्मी का मौसम हर किसी को परेशान कर देता है। इस मौसम में बच्चे, बड़े व बूढ़ों सभी को घमौरी की समस्या होती है जो कि बिल्कुल आम है। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम गर्मी में घमौरी का इलाज, घमौरी हटाने का तरीका और घमौरियों से बचने के उपाय लेकर आए हैं। इसके अलावा, यहां हम घमौरी आखिर है क्या और यह क्यों होती है, यह भी बताएंगे।

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सबसे पहले जानते हैं घमौरी क्या है।

घमौरी क्या है? What is Ghamori (Heat Rash)?

घमौरी एक प्रकार की त्वचा संबंधी समस्या है, जो गर्मी के मौसम में होती है। इसमें त्वचा पर लाल छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं। ये दाने आमतौर पर गर्दन, छाती के ऊपरी भाग, कमर, स्तनों के नीचे व कोहनी के बीच में होते हैं। इसका मुख्य कारण पसीने की ग्रंथियों में रुकावट को माना जाता है। इसे मेडिकल भाषा में मिलियारिया (Miliaria) या एक्रीन मिलियारिया के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा इसे स्वेट रैश, हीट रैश, प्रिक्ली हीट व अन्य नामों से भी जाना जाता है (1)। लेख में आगे में हमने इसके कारणों को विस्तार से बताया है।

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घमौरियों से बचने के उपाय जानने से पहले इसके होने के कारण जान लेते हैं।

घमौरियों के कारण – Causes of Ghamori (Heat Rash) In Hindi

यहां हम घमौरियों के होने के कारण बता रहे हैं, जो इस प्रकार से हैं (1) :

  • घमौरी होने का सबसे मुख्य कारण है गर्मी और उमस भरा मौसम।
  • इसके अलावा, मिलियारिया होने का एक कारण पसीने की ग्रंथियों में रुकावट भी है। ये रुकावट त्वचा में मौजूद स्टेफिलोकोकस एपिडरमाइडिस नामक बैक्टीरिया की वजह से होता है। ये बैक्टीरिया त्वचा की रोम छिद्र को बंद कर देते हैं, जिस वजह से पसीना शरीर से बाहर नहीं निकल पाता और यह दाने यानी घमौरियों के पनपने का कारण बनने लगता है।
  • कुछ दवाएं, जिसके सेवन से अत्यधिक पसीना आता है।
  • टाइट या सिंथेटिक कपड़े पहनने की वजह से।
  • अत्यधिक शारीरिक गतिविधि करने के कारण।

आगे पढ़े लक्षण

घमौरी हटाने का तरीका जानने से पहले उसके लक्षणों के बारे में जानना आवश्यक है।

घमौरियों के लक्षण – Symptoms of Heat Rash in Hindi

घमौरियों के उत्पन्न होने पर कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं जिनके बारे में हम नीचे बता रहे हैं (2) (1):

बने रहें हमारे साथ

अब जानते हैं घरेलू उपाय के जरिए घमौरी हटाने का तरीका।

घमौरियों के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies For Ghamori (Heat Rash) in Hindi

यहां हम घमौरी का घरेलू इलाज हिंदी में लेकर आए हैं, जिनकी मदद से इसके लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। चलिए, जानते हैं कि घरेलू नुस्खों की मदद से घमौरी का इलाज कैसे किया जा सकता है:

1. मुल्तानी मिट्टी

सामग्री :

  • दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी
  • पानी आवश्यकतानुसार
  • एक बाउल

उपयोग का तरीका :

  • एक बाउल में मुल्तानी मिट्टी और पानी को अच्छे से मिक्स कर लें।
  • फिर इस मिश्रण को प्रभावित हिस्से पर अच्छे से लगाएं।
  • 15 मिनट बाद नॉर्मल या ठंडे पानी से धो लें।
  • हफ्ते में चार दिन इस उपाय को अपना सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी के लाभ तो हैं ही, साथ ही इसका उपयोग हीट रैश के लिए भी किया जा सकता है। इस पर हुए एक शोध से जानकारी मिलती है कि मुल्तानी मिट्टी में एंटीमाइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं (3)। बता दें कि एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव फंगल, बैक्टीरिया, वायरस व परजीवियों को पनपने से रोकने में मदद कर सकता है (4)।

वहीं, जैसा कि हमने लेख में बताया कि घमौरी होने का एक कारण स्टेफिलोकोकस एपिडरमाइडिस नामक बैक्टीरिया को भी माना जाता है (1)। इस आधार पर माना जा सकता है कि हीट रैश से बचने के लिए मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाना लाभकारी हो सकता है।

2. चंदन पाउडर

सामग्री :

  • दो चम्मच चंदन पाउडर
  • 4 चम्मच गुलाब जल
  • एक कटोरी

उपयोग का तरीका :

  • एक कटोरी में चंदन पाउडर व गुलाब जल को अच्छे से मिला लें।
  • फिर इस तैयार हुए लेप को प्रभावित हिस्से पर लगाएं।
  • 10 से 15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें।
  • सप्ताह में दो से तीन पर इसका उपयोग किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

चंदन पाउडर को गुलाब जल के साथ मिलाकर घमौरियों पर लगाने से राहत मिल सकती है (5)। इसके पीछे चंदन में मौजूद एंटी माइक्रोबियल गुण को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है । इसका यह गुण घमौरी का कारण बनने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद कर सकता है(6)।

इसके अलावा, चंदन पाउडर में ठंडक प्रभाव होता है जो कि त्वचा को शांत रखने के साथ जलन, खुजली से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है (6)। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि चंदन न केवल गर्मी में घमौरी का इलाज कर सकता है बल्कि उसके कारण होने वाले जलन और खुजली को भी शांत कर सकता है।

3. दही

सामग्री :

  • दही (आवश्यकतानुसार)
  • कटोरी

उपयोग का तरीका :

  • सबसे पहले एक कटोरी में दही लें।
  • इसके बाद प्रभावित हिस्से पर लगाएं।
  • करीब 15 से 20 मिनट बाद इसे पानी से धो लें।
  • रोजाना दिन में एक बार इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

घमौरी का घरेलू इलाज में अब बारी है दही के उपयोग की। दही में भी एंटीबैक्टीरियल यानी बैक्टीरिया को खत्म करने वाले गुण मौजूद होते है (7)। जैसा कि हमने लेख में बताया कि त्वचा में मौजूद स्टेफिलोकोकस एपिडरमाइडिस नामक बैक्टीरिया के कारण भी घमौरी की समस्या हो सकती है (1)। इस आधार पर माना जा सकता है कि घमौरियों से बचने के उपाय में दही को शामिल करना लाभकारी साबित हो सकता है।

4. बेकिंग सोडा

सामग्री :

  • दो चम्मच बेकिंग सोडा
  • ठंडा पानी
  • मुलायम और साफ कपड़ा

उपयोग का तरीका :

  • बेकिंग सोडा व पानी को मिक्स कर लें।
  • अब इस मिश्रण में साफ कपड़ा डुबोएं।
  • फिर इस कपड़े को अच्छे से निचोड़कर प्रभावित हिस्से पर लगाएं।
  • इसके बाद 10 मिनट तक उसे ऐसे ही छोड़ दें।
  • फिर ठंडे पानी से धो लें।
  • हफ्ते में तीन दिन इसका उपयोग किया जा सकता है।

कैसे है फायदेमंद :

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल भी घमौरियों से राहत पाने के लिए किया जा सकता है। शोध में बताया गया है कि बेकिंग सोडा का पेस्ट घमौरियों पर लगाने से राहत मिल सकती है (5)। दरअसल, बेकिंग सोडा एंटीबैक्टीरियल गुण से समृद्ध होता है, जो बैक्टीरिया को पनपने से रोकने में मदद कर सकता है (8)।

वहीं, घमौरी होने का कारण त्वचा में मौजूद बैक्टीरिया स्टेफिलोकोकस एपिडरमाइडिस की वजह से होता है क्योंकि यह त्वचा के रोम छिद्रों को बंद कर देता है (1)। ऐसे में बेकिंग सोडा का एंटीबैक्टीरियल गुण घमौरियों को दूर करने में सहायक हो सकता है।

5. एलोवेरा

सामग्री :

  • दो चम्मच एलोवेरा जेल

उपयोग का तरीका :

  • एक बाउल में एलोवेरा जेल लें फिर इसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
  • इसके बाद जेल को ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें।
  • अगर चाहे तो आधे घंटे बाद ठंडे पानी से नहा लें।

कैसे है फायदेमंद :

त्वचा के लिए एलोवेरा बेहद लाभकारी माना जाता है। शोध की मानें तो एलोवेरा जेल से हल्के हाथों से मसाज करने से घमौरियों से राहत मिल सकती है (5)। दरअसल, एलोवेरा में एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं, जो बैक्टीरिया से लड़ने में मदद कर सकते हैं (9)। वहीं, घमौरियों का एक कारण स्टेफिलोकोकस एपिडरमाइडिस बैक्टीरिया को भी माना जाता है (1)। ऐसे में माना जा सकता है कि एलोवेरा बैक्टीरिया को खत्म कर घमौरी की समस्या से निजात दिला सकता है।

इसके अलावा, एलोवेरा जेल में ठंडक प्रभाव और मॉइस्चराइजिंग गुण भी मौजूद होते हैं (10)। इसका यह गुण घमौरियों के कारण त्वचा पर होने वाली जलन को शांत करने में मदद कर सकता है (1)। इस आधार पर मान सकते हैं कि घमौरी हटाने का तरीका में एलोवेरा जेल को शामिल किया जा सकता है।

6. आलू

सामग्री :

  • एक आलू

उपयोग का तरीका :

  • सबसे पहले आलू को पतले स्लाइस में काट लें।
  • फिर उस कटे हुए आलू को 10 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें।
  • इसके बाद फ्रिज से उस टुकड़े को निकालकर घमौरी वाले हिस्से पर लगाएं।
  • इस प्रक्रिया को दो से तीन बार दोहराएं।
  • दिन भर में एक से दो बार इसे आजमा सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

त्वचा की समस्या में आलू के रस के फायदे मददगार हो सकता है, यह त्वचा में होने वाली जलन और चुभन से राहत दिला सकता है (11)। साथ ही आलू में एंटी माइक्रोबियल गुण भी मौजूद होता है (12)। ऐसे में माना जा सकता है कि आलू का यह गुण घमौरी का कारण बनने वाले बैक्टीरिया को पनपने से रोकने में मदद कर सकता है, जिससे घमौरी की समस्या से निजात मिल सकती है।

7. नीम

सामग्री :

  • नीम की पत्तियां (आवश्यकतानुसार)
  • पानी

उपयोग का तरीका :

  • सबसे पहले नीम की पत्तियों को मिक्सर में पीस लें।
  • इसके बाद इस पेस्ट को प्रभावित हिस्से पर लगाएं।
  • कुछ समय तक इसे ऐसे ही छोड़ दें।
  • 15 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें।
  • ये प्रक्रिया हफ्ते में एक से दो बार आजमा सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

घमौरियों का इलाज करने के लिए घरेलू उपचार के रूप में नीम का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। घमौरियों पर हुए एक शोध से पता चलता है कि नीम में भी एंटी माइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं, जो घमौरियों से राहत दिला सकते हैं। इसके लिए नीम के पत्तों को पीसकर उसका लेप लगाने की सलाह दी जाती है (5)।

8. खीरा

सामग्री :

  • एक खीरा

उपयोग का तरीका :

  • सबसे पहले खीरा को पतले स्लाइस में काट लें।
  • अब कटे हुए खीरे को कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें।
  • 10 से 15 मिनट बाद इसे फ्रिज से निकालकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
  • ये तब तक लगाकर रखें जब तक इसकी गर्माहट न महसूस हो।
  • दिन भर में एक से दो बार इस उपाय को आजमा सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

घमौरियों का रामबाण इलाज खीरा को माना जा सकता है। दरअसल खीरा में ठंडक प्रभाव मौजूद होता है जो कि त्वचा को शांत रखने के साथ जलन, खुजली से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है (13)। बता दें कि घमौरी होने पर त्वचा पर लाल दाने, जलन व खुजली की समस्या होने लगती है (1)। इस आधार पर मान सकते हैं कि घमौरी के लक्षणों से राहत पाने में खीरा लाभकारी हो सकता है।

9. आंवला

सामग्री :

  •  से तीन आंवला

उपयोग का तरीका :

  • किसी बर्तन में आंवला को दो भागों में काट लें।
  • अब एक बर्तन में पानी भरें व इन टुकड़ों को डाल दें।
  • रातभर आंवला को ऐसे ही छोड़ दें।
  • अगली सुबह उसी पानी में आंवला को मैश करें।
  • अब इस मिश्रण को किसी गिलास में छाने और सेवन करें।
  • अगर चाहे तो इसके कड़वापन को कम करने के लिए इसमें शहद मिला सकते हैं।
  • इसे दिन में एक बार पी सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद :

शोध की मानें तो आंवला में एंटीमाइक्रोबियल यानी बैक्टीरिया को रोकने वाले गुण मौजूद होता है (14)। घमौरी के दौरान होने वाले संक्रमण को रोकने के लिए एंटी बैक्टीरियल की अहम भूमिका होती है (15)। इस आधार पर एंटी माइक्रोबियल गुण के कारण घमौरियों से बचने के उपाय में आंवला के फायदे देखे जा सकते हैं।

10. ओट्स

सामग्री :

  • तीन से चार कप ओट्स
  • गुनगुना पानी
  • बाल्टी या फिर बाथटब

उपयोग का तरीका :

  • सबसे पहले गुनगुने पानी में ओट्स डालें।
  • अब इसे थोड़ा चला लें।
  • करीब 20 मिनट तक बाथटब में बैठें।
  • फिर नहाने के बाद तौलिये के सहारे शरीर को हल्के हाथों से पोछें।

कैसे है फायदेमंद :

घमौरियों का रामबाण इलाज ओट्स को माना जा सकता है। शोध की मानें तो घमौरियों के लिए सबसे आम उपायों में ओटमील बाथ शामिल है। इसे हर्बल ट्रीटमेंट के तौर पर घमौरी हटाने का तरीका में शामिल किया जा सकता है। ये उपचार ज्यादातर एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-प्रुरिटिक प्रभाव दिखाते हैं जो कि त्वचा को मॉइस्चराइज और सूदिंग करने का काम कर सकते हैं (5)। ऐसे में माना जा सकता है कि घमौरी में राहत दिलाने ओट्स के फायदे देखे जा सकते हैं।

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लेख में आगे घमौरी का इलाज से जुड़ी जानकारी हासिल करेंगे।

घमौरियों का इलाज – Treatment of Ghamori (Heat Rash) in Hindi

आमतौर पर मिलियारिया यानी घमौरी के इलाज की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि ये खुद ब खुद 24 घंटे में समाप्त हो जाते हैं। वहीं, कुछ मामलों में डॉक्टर घमौरी का इलाज करने के लिए निम्नलिखित सलाह दे सकते हैं (1)

  • मिलियारिया यानी घमौरी से राहत पाने के लिए इंफ्लामेशन संबंधित क्रीम लगाने की सलाह दी जा सकती है।
  • इसके अलावा, घमौरी के इलाज में संक्रमण को खत्म करने के लिए एंटीबायोटिक दवाइयों की भी सिफारिश की जा सकती है।

अब पढ़े बचाव

घमौरी का इलाज जानने के बाद अब जानते हैं घमौरियों से बचने के उपाय।

घमौरियों से बचने के उपाय – Prevention Tips for Ghamori (Heat Rash) in Hindi

इस लेख को पढ़ने के बाद अगर मन में यह सवाल आ रहा होगा कि घमौरियों से बचने के उपाय कैसे किए जा सकते हैं तो, नीचे हम कुछ ऐसे ही टिप्स बता रहे हैं जिन्हें ध्यान में रखकर घमौरियों के जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है (15) :

  • घमौरियों से बचने के उपाय में सबसे जरूरी चीज है अधिक पसीने से बचाव।
  • कोशिश करें कि कमरे का वातावरण ठंडा रखें।
  • अधिक कपड़े पहनने से बचें। साथ ही कोशिश करें कि हल्के व आरामदेह कपड़े पहनें।
  • इसके अलावा, टाइट कपड़े या उसके घर्षण से भी बचें।
  • घमौरियों से बचने के लिए नहाने के दौरान साबुन का उपयोग भी आवश्यक है।
  • साथ ही कैलामाइन लोशन के इस्तेमाल से भी घमौरियों से बचा जा सकता है।

समय रहते घमौरियों की पहचान कर अगर घरेलू उपचार किया जाए तो इससे बचा जा सकता है। यही कारण है किइस लेख में घमौरी हटाने का तरीका के साथ ही साथ घमौरियों का रामबाण इलाज के बारे में बताया गया है। हालांकि, अगर घमौरियों की समस्या अधिक गंभीर है तो ऐसे में बेहतर होगा कि घमौरी का घरेलू इलाज करने के बजाए बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुड़ी जानकारी के लिए पढ़ें स्टाइलक्रेज के अन्य लेख।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घमौरी को दूर होने में कितना समय लगता है?

घमौरी के खत्म होने का कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं है। हालांकि शोध की मानें तो अगर यह हल्के होते हैं तो सामान्य तौर अपने आप ही समाप्त हो जाते हैं (1)

क्या घमौरी फैल सकता है?

हां, अगर इसके लाल दानों में तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं और उसे साफ नहीं किया जाता है, तो इसकी चिपचिपाहट बढ़ जाती है और यह फैलने लगता है। ऐसी स्थिति गंभीर रूप ले सकती है (16)।

क्या एलोवेरा घमौरी के लिए अच्छा हो सकता है?

हां, बिल्कुल शोध की मानें तो घमौरियों के सबसे आम हर्बल उपायों में एलोवेरा जेल को भी शामिल किया गया है। एलोवेरा जेल के हल्की मालिश से घमौरी से राहत मिल सकता है (5)।

संदर्भ (sources)

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  1. Miliaria
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK537176/
  2. Heat Rash
    https://www.cdc.gov/niosh/topics/heatstress/heatrelillness.html#rash
  3. A REVIEW: HERBAL REMEDIES-AN END TO END CURE FOR FUNGAL INFECTION
    https://storage.googleapis.com/journal-uploads/wjpps/article_issue/1604139935.pdf
  4. Antimicrobials
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC7120529/
  5. MILIARIA- AN UPDATE
    https://www.researchgate.net/publication/318982410_MILIARIA-_AN_UPDATE
  6. PREPARATION AND EVALUATION OF HERBAL FACE PACK
    https://www.mchemist.com/herboglo/pdf/4%20rakta%20chandan.pdf
  7. Antibacterial and antiproliferative peptides in synbiotic yogurt—Release and stability during refrigerated storage
    https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0022030216300790
  8. Antibacterial activity of baking soda
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/12017929/
  9. Aloe vera: The Miracle Plant Its Medicinal and Traditional Uses in India
    https://www.phytojournal.com/vol1Issue4/Issue_nov_2012/17.1.pdf
  10. Therapeutic and Medicinal Uses of Aloe vera: A Review
    https://www.researchgate.net/publication/262698658_Therapeutic_and_Medicinal_Uses_of_Aloe_vera_A_Review
  11. Health Benefits and Cons of Solanum tuberosum
    https://www.plantsjournal.com/vol1Issue1/Issue_jan_2013/3.pdf
  12. Antifungal and antimicrobial proteins and peptides of potato (Solanum tuberosum L.) tubers and their applications
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31144014/
  13. Invigorating Efficacy of Cucumis Sativus for Healthcare & Radiance
    https://www.pharmaresearchlibrary.com/wp-content/uploads/2014/04/IJCPS2001.pdf
  14. Comparative Evaluation of Antibacterial Efficacy of Six Indian Plant Extracts against Streptococcus Mutans
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4378808/
  15. Congenital miliaria crystallina – A diagnostic dilemma
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3862747/
  16. Miliaria: An Update
    https://www.rjpbcs.com/pdf/2017_8(4)/[162].pdf

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