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सिद्धासन योग करने का तरीका और फायदे- Siddhasana Yoga in Hindi

आजकल शरीर को स्वस्थ रखना एक चुनौती बन गया है। आए दिन लोग किसी-न-किसी शारीरिक या मानसिक समस्या की चपेट में आ ही जाते हैं। इससे न सिर्फ व्यक्तिगत जीवन प्रभावित होता है, बल्कि सामाजिक जीवन और कामकाज पर भी असर पड़ता है। लिहाजा, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए सिद्धासन योग प्रभावी साबित हो सकता है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में सिद्धासन योग करने के लाभ व अन्य जरूरी जानकारी दे रहे हैं।

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इस लेख की शुरुआत हम सिद्धासन क्या होता है, यह बताते हुए कर रहे हैं।

सिद्धासन क्या है?

सिद्धासन शब्द को संस्कृत भाषा से लिया गया है। यह संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें पहला सिद्ध यानी पूर्ण और दूसरा आसन का मतलब मुद्रा होता है। इस योग को अंग्रेजी भाषा में अककॉम्पलिश पोज (Accomplished Pose) के नाम से भी जाना जाता है। यह हठ योग के अंतर्गत आता है (1)। इस योग के दौरान व्यक्ति को ध्यान की मुद्रा में बैठकर अपने मन पर काबू करना होता है।

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अब हम सिद्धासन के फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं।

सिद्धासन योग करने के फायदे- Benefits of Siddhasana Yoga in Hindi

सिद्धासन योग करने के लाभ इसका नियमित अभ्यास करने से कुछ दिन बाद दिखाई दे सकते हैं। सिद्धासन के फायदे कुछ इस प्रकार से नजर आ सकते हैं।

1. पीठ के निचले भाग को मजबूत करे

सिद्धासन पीठ के निचले भाग को मजबूत कर सकता है। जैसा कि हमने बताया है कि यह हठ योग के अंतर्गत आता है। इससे जुड़े रिसर्च पेपर में बताया गया है कि हठ योग पीठ के निचले हिस्से को मजबूत करने का काम कर सकता है। साथ ही यह पीठ के निचले हिस्से के दर्द से भी राहत दिला सकता है (2)।

2. मांसपेशियों की मजबूती

सिद्धासन योग करने के लाभ मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए भी हो सकते हैं। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर पब्लिश रिसर्च द्वारा इस बात की पुष्टि की गई है। इस शोध में दिया है कि मूलबंध योग के नियमित अभ्यास से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की मजबूती को बनाया रखा जा सकता है। वहीं, मूलबंध योग की सूची में सिद्धासन का नाम भी शामिल है (3)। इस आधार पर माना जा सकता है कि सिद्धासन मांसपेशियों को मजबूत बना सकता है।

3. एड़ियों वाले भाग को स्ट्रेच करे

सिद्धासन को करने पर पूरे शरीर को स्ट्रेच करने में मदद मिल सकती है। दरअसल, हठ योग को स्ट्रेचिंग के लिए अच्छा माना जाता है। इससे एड़ी वाले हिस्से में भी खिंचाव हो सकता है (2)। फिलहाल, इस संबंध में वैज्ञानिक शोध का अभाव है।

4. तंत्रिका तंत्र को शांत करे

सिद्धासन के फायदे तंत्रिका तंत्र को शांत करने के लिए भी हो सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन की मानें, तो तनाव के कारण तंत्रिका तंत्र अशांत हो सकती है (4)। दूसरे रिसर्च के अनुसार, सिद्धासन योग को करने पर मानसिक और शारीरिक तनाव को दूर किया जा सकता है (5)। इससे तंत्रिका तंत्र शांत हो सकती है।

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इस लेख के अगले भाग में हम सिद्धासन योग करने का तरीका बता रहे हैं।

सिद्धासन योग आसन करने का तरीका

किसी भी योग को बिना प्रशिक्षक के करना बहुत मुश्किल होता है, पर अगर कोई सिद्धासन योग करना चाहता है, तो उनके लिए लेख का यह भाग मददगार हो सकता है। लेख के इस भाग में हम सिद्धासन योग करने की सही विधि बता रहे हैं (5)।

  • सिद्धासन करने के लिए सबसे पहले योग मैट बिछाकर उसपर पैरों को सीधा फैलाकर बैठ जाएं।
  • इस दौरान दोनों पैर के बीच में थोड़ी दूरी होनी चाहिए। साथ ही रीढ़ की हड्डी सीधी रहेगी।
  • अब अपने दाएं पैर को मोड़कर तलवे को बाईं जांघ के नीचे ले आएं।
  • फिर बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं जांघ के ऊपर रख दें।
  • इसके बाद दोनों हथेलियां को घुटनों के ऊपर रख दें।
  • अब अपनी दोनों आंखों को बंद कर लें और सामान्य गति से सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • इस योग को विराम ले लेकर 5 से 10 मिनट तक कर सकते हैं।

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आगे पढ़ते हैं सिद्धासन योग को करने से जुड़ी सावधानियों के बारे में।

सिद्धासन योग को करने से जुड़ी सावधानियां- Precautions of Siddhasana Yoga in Hindi

सिद्धासन योग के दौरान कई सारी छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखना होता है। इन सावधानियों की वजह से ही सिद्धासन के फायदे होते हैं। नीचे हम इन्हीं सावधानियों के बारे में बता रहे हैं।

  • सिद्धासन को सुबह के समय खाली पेट करना चाहिए। अगर शाम को करने का सोच रहे हैं, तो इस योग को करने के 3 घंटे पहले तक कुछ न खाएं।
  • रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी होने पर इस योग को करने से बचें।
  • डायरिया की समस्या में ये आसन न करें।
  • हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को यह योग नहीं करना चाहिए।
  • अगर किसी तरह की गंभीर समस्या या गर्भवती हैं, तो इसे करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

योग स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा और आसान तरीका होता है, इसे किसी भी साफ स्थान पर किया जा सकता है। योग से दिन की शुरुआत करने पर पूरा दिन अच्छे से गुजर सकता है और अपनी दैनिक गतिविधि को अच्छी तरह किया जा सकता है। सिद्धासन योग को किस तरह से करना है, इसकी जानकारी हमने ऊपर लेख में दी है। हम आशा करते हैं कि हमारे इस लेख में दी गई सभी जानकारी आपके लिए मददगार साबित होगी।

अक्सर पूछे जाने वाला सवाल:

सिद्धासन और सुखासन में क्या अंतर है?

सिद्धासन में एक पैर के पंजे को जांघ के ऊपर रखना पड़ता है, जबकि सुखासन दोनों पंजे जमीन पर ही होते हैं। इन दोनों के बीच में यही अंतर है, बाकी दोनों लगभग एक जैसे ही होते हैं।

संदर्भ (Sources) :

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  1. Hatha Yoga Practices: Energy Expenditure Respiratory Changes and Intensity of Exercise
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3135902/
  2. Low back pain profile in Hatha Yoga practitioners
    https://www.academia.edu/17157380/Low_back_pain_profile_in_Hatha_Yoga_practitioners
  3. Effect of Mula Bandha Yoga in Mild Grade Pelvic Organ Prolapse: A Randomized Controlled Trial
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5934946/
  4. The impact of stress on body function: A review
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5579396/
  5. STUDY OF EFFECT OF SIDDHASANADI ASANAS ON RANGE OF MOTION OF HIP JOINT ON HEALTHY VOLUNTEERS
    https://www.researchgate.net/publication/342765735_STUDY_OF_EFFECT_OF_SIDDHASANADI_ASANAS_ON_RANGE_OF_MOTION_OF_HIP_JOINT_ON_HEALTHY_VOLUNTEERS

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